यमुनोत्री धाम और तीर्थ यात्रा की – सम्पूर्ण जानकारी

दोस्तों इस लेख में यमुनोत्री धाम कैसे पहुंचे , यमुनोत्री यात्रा कैसे करे , कब जाये , कैसे जाये , रुकने और खाने की क्या व्यबस्था है और यमुनोत्री का दर्शन की पूरी जानकारी बताई गयी है आपसे अनुरोध है की इसे अंत तक पढ़े ।

उत्तराखंड के उत्तर कशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम माँ यमुना नदी का उद्गम स्थल है इसके साथ ही 4 धाम यात्रा की शुरुआत भी यही से प्रारम्भ होती है ।

यमुनोत्री धाम हिन्दू तीर्थ में सबसे प्रमुख स्थलों में से एक है यहाँ से 4 धाम की यात्रा की शुरुआत होती है यमुनोत्री के पर्वतो से यमुना नदी निकलकर प्रयागराज ( इलाहाबाद ) पहुंचकर गंगा में मिल जाती है।

ताजी ठंडी सुहावनी हवाओ और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ रास्ते के चारो तरफ बर्फ से ढके हुए पहाड़ो और झरनो के साथ कल कल करती हुयी यमुना की जलधारा मानो स्वर्ग सा अहसास दिलाता है कुछ ऐसा है यमुनोत्री का सफर ।

इसीलिए लाखो करोडो श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र यमुनोत्री हर साल मई जून के महीने में अक्षय तृतीया के दिन कपाट खोला जाता है और ऑक्टूबर के कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है। सर्दियों में मंदिर बंद करने का कारण यह भी है की यहाँ भरी बर्फ़बारी होती जिससे रास्ते और मंदिर पूरी तरह से बर्फ से ढँक जाते है ।

यमुनोत्री यात्रा करते समय किन बातो का रखे ध्यान

  • यमुनोत्री मार्ग में पैदल यात्रियों के लिए छड़ी या लाठी अपने साथ में जरूर रखे जिससे चढ़ई दर रास्ता चढाने में सहूलियत हो जाती है
  • यमुनोत्री यात्रा बरसात के मसम यानि की जुलाई और अगस्त में जाने से बचे क्योंकि यहाँ बहुत बारिस होती है जिससे आपकी यात्रा में आनंद नहीं आ पायेगा .
  • यमुना जी दर्शन के लिए जब आप यमुनोत्री जाते है तो यमुनोत्री यात्रा के पैदल मार्ग में सात किलोमीटर के सफर में कही न कही बारिश हो ही जाती है चाहे कोई भी मौसम हो यहाँ हर दिन बारिश होती है जिससे बचने के लिए अपने साथ रेन कोट या छाता जरूर रहे जो जानकी चट्टी में 25 रूपए में मिल जाती है । .

यमुनोत्री मंदिर का इतिहास – History of yamunotri in hindi

इस मंदिर का निर्माण टिहरी गढ़वाल के राजा सुदर्शन के द्वारा करवाया गया था जो प्राकृतिक आपदा के बजह से ध्वस्त हो गया था बाद में इसका पुनर्निर्माण जयपुर की रानी गुलेरिया के द्वारा 19 वी सताब्दी के अंत में करवाया गया था ।

पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुनोत्री असिति ऋषि का निवास स्थान था जहाँ पर बैठ कर उन्होंने हजारो बर्षो माँ यमुना की तपस्या किये थे जिन्होंने अपने बृद्धावस्था के दौरान कालिंदी पर्वत में स्थित सप्तऋषि कुंड में स्नान करने के लिए नहीं जा पाए उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ यमुना उन्ही की कुटिया से प्रकट हो गयी और उसी दैवीय स्थान को यमुनोत्री धाम के नाम से जाना जाता है ।

यमुना जी सूर्य देवता की पुत्री है और साथ में भगवान श्री की 8 पटरानियों में से एक यमुना जी है लेकिन ज्यादातर लोग इससे अनजान है ।

यमुनोत्री धाम कैसे पहुंचे – How to reach yamunotri dham in hindi

यमुनोत्री पहुंचने के लिए आपके पास 3 बिकल्प है

बाय रेल मार्ग – दोस्तों यदि आप ट्रैन से सफर करते हुए यमुनोत्री पहुंचना चाहते है तो इसके लिए आपके पास 3 बिकल्प है देहरादून , हरिद्वार , और ऋषिकेश ,

लेकिन मै आपको हरिद्वार पहुंचने के लिए sugesst  करूँगा क्योंकि यमुनोत्री यात्रा के लिए हरिद्वार से बस की सुबिधा काफी अच्छी है जो सफर को आसान बना देती है ।

दोस्तों यमुनोत्री की यात्रा में जाने के लिए ट्रैन का सफर यही तक संभव हो पायेगा क्योंगी वहां पहुंचने का जो रास्ता है वो ऊँचे ऊँचे पहाड़ो से बना हुआ है जिसकी बजह से यमुनुनोत्री तक ट्रैन सभव नहीं है ।

इसके आगे का सफर बस या प्राइवेट टैक्सी के द्वारा करना पड़ेगा जो की हरिद्वार रेलवे स्टेशन से बसों का दिन भर आवागमन चलता होता रहता है जो सुबह 5 बजे से शाम 8 बजे तक चलता रहता है।

बया हबाई जहाज

अगर आप हबाई यात्रा करके यमुनोत्री दर्शन के लिए जाने की सोच रहे है तो बता दू की इसके जो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है जॉली ग्रांट देहरादून का है । अगर आपके शहर से डायरेक्ट देहरादून के लिए फ्लाइट है तो बैठ सकते है अन्यथा दिल्ली आकर देहरादून के लिए फ्लाइट पकड़ सकते है ।

फ्लाइट का सफर भी यही तक सम्भव है इसके आगे यमुनोत्री तक आपको 180 किलोमीटर की दूरी बस से तय करनी पड़ेगी ।

जब आप जानकी चट्टी पहुंच जाये तो इसके आगे का सफर कैसे तय होता ये जान लेते है

जानकी चट्टी से यमनोत्री मंदिर कैसे पहुंचे

माँ यमुना के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु भक्ति भाव से गंगा यमुना के नारे लगते हुए जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर की तरफ पैदल यात्रा करते हुए निकलते है ।

जानकी चट्टी से यमनोत्री मंदिर तक जाने के लिए 7 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई बाले मार्ग पर चलना पड़ता है

लेकिन ध्यान दे चढ़ाई चढ़ने के लिए जानकी चट्टी के पास छड़ी या लाठी खरीद दे जिससे चलने सहूलियत होगी जो की आसानी से वही पर मिल जाती है ।

जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक पहुंचने के 3 बिकल्प है

  • घोड़े खच्चर – यदि आपको चलने में कोई तकलीफ है या स्वस्थ सम्बन्धी कोई प्रॉब्लम है और आप घोड़े खच्चर ले माद्यम से मंदिर तक पहुंचना चाहते है उसके लिये ढाई हजार रूपए में आपको एक बार के लिए मिल जायेंगे ।
  • पालकी – दूसरा बिकल्प है पालकी जो की पालकी में बैठकर आपको दर्शन करवाया जाता है जिसका चार्ज 2 से 3 हजार रूपए लिया जाता है ।
  • पैदल यात्रा – तीसरा और सबसे अच्छा बिकल्प है पैदल यात्रा जो की बिलकुल फ्री में हो जाती है । यमुना नदी पहाड़ से उतरते हुए नीचे की तरफ आती है और नदी के किनारे से पैदल यात्रा करना \ काफी सुखद महसूस होता है ।

इस दिव्या अलौकिक वातावरण में दर्शनार्थी श्रद्धा भाव से गंगा यमुना नारे लगते हुए आगे की तरफ बढ़ते रहते है पहाड़ो से गुजरने बाला ये रास्ता काफी रोमांचक होता है ।

जानकी चट्टी से पैदल यात्रा करते हुए श्रद्धालु माँ यमुना जी का जैकारे लगते हुए अपने सफर का भरपूर आनंद लेते है चारो तरफ बर्फीले पहाड़ उसके बीचे बीच पतली गलियारों से पैदल यात्रा करते हुए श्रद्धालु इस प्रकृति की खूबसूरती को देखते हुए मंदिर तक पहुंचते है और उन्हें दिव्य वातावरण में माँ यमुना का दर्शन मिलता है ।

यमुनोत्री दर्शन कैसे करे

भक्त सबसे पहले यमुनोत्री मंदिर परिसर में पहुंचकर कुंड में स्नान करते है जो की काफी गर्म पानी होता है और यहाँ तो हमेश ही सर्दियों का मौसम रहता है जिससे इस कुंड में नहाने से थोड़ा ठण्ड से राहत मिलती है ।

सूर्य कुंड के पास में स्थित एक शिला है जिसे दिव्य शिला कहा जाता है भक्त देवी की पूजा करने से पहले इस शिला में दर्शन करते है

यमुनोत्री धाम में कई प्राकृतिक गर्म पानी के कुंड मौजूद है जिनमे से सबसे प्रसिद्द सूर्य कुंड माना जाता है यहाँ आने बाले श्रद्धालु माँ यानुना देवी को प्रसाद चढाने के लिए अपने साथ चावल और आलू को कपड़े की पोटली में बांधकर सूर्य कुंड में पकाते है ।

यमुनोत्री दर्शन करने के बाद भक्त अपने पकाये हुए चावल को प्रसाद के रूप में घर ले जाते है

मंदिर परिसर से एक अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है जो हजारो फिट ऊँचे पर्वतो से ग्लेशियर के पिघलने से पानी की झिलमिल सी जलधारा बहती है जैसे जैसे पतली सी जलधारा आगे की तरफ बढ़ती है तो वैसे वैसे अपना विकराल रूप धारण करने गलती है ।

जिससे एक विशाल नदी का आकर लेती है जिसे हम यमुना नदी के नाम से जानते है सच में ये प्रकृति का इतना खूबसूरत दृश्य आपके जीवन के सबसे यादगार लम्हो में से एक होगा ।

यकीन मनिये दोस्तों ये इतनी खूबसूरत जगह है की आप यहाँ बैठ कर प्रकृति की वादियों का और पिघलत हुए ग्लेशियर का नजारा देख सकते है ।

यमुना का उद्गम स्थल मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर आगे से होती है जिसका रास्ता कठिन होने की बजह से बहुत कम ही पर्यटक वहां तक पहुंचते है ।

माँ यमुना के दर्शन करने के बाद 4 बजे वहां से जानकी चट्टी के लिए जरूर निकल ले क्योंकि उस समय बहुत ज्यादा ठण्ड बढ़ जाती है जिससे आने में दिक्कत हो सकती है और साथ में शाम के साय बारिस अवश्य होती है ।

यमुनोत्री यात्रा कब जाये

  • दोस्तों यमुनोत्री धाम की यात्रा करने के लिए सितम्बर से ऑक्टूबर के महीने में सबसे अच्छा समय होता है क्योंकि इस समय यहाँ ज्यादा भीड़ भाड़ भी नहीं देखने को मिलता जिसकी बजह से आपके बजट भी कम लगेगा ।
  • और अगर यही हम बात करे मई जून यानि की गर्मियों के मौसम में तो ये समय यहाँ आने का पीक टाइम होता है क्योंकि गर्मियों की छुट्टी की बजह से काफी ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच जाते है उस समय होटल और खाने पीने की वस्तुए का रेट डबल हो जाता है ,
  • यदि हम बरसात के समय यानि जुलाई और अगस्त की बात करे तो उस समय काफी ज्यादा यहाँ बारिश होती है जिसकी बजह से यात्रा करने में थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और उतना आनंद भी नहीं आता ।

यमुनोत्री मंदिर कब खुलता है

यमुना दर्शन को जाने से पहले ये जानना जरूरी है की यमुनोत्री मंदिर कब खुलता है तो जानकारी के लिए बता दू की हर साल मई जून के महीने में अक्षय तृतीया के दिन मंदिर का कपट खोला जाता है और ऑक्टूबर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर का कपाट अगले 6 महीने के लिए बंद कर दिया जाता है ।

इसका करना ये है की सर्दियों के महीने में यमुनोत्री के रास्ते और मंदिर पूरी तरह से बर्फ से ढक जाता है जिसकी बजह से मंदिर बंद करना पड़ता है ।

मंदिर का कपाट बंद होने से पहले माँ यमुना को बड़े धूम धाम के साथ सजाया जाता है और फिर पालकी में बैठाकर खरसाली गांव लाया जाता है और अगले 6 माह तक उनकी पूजा इसी स्थान पर होती है

यमुनोत्री में कहाँ रुकना चाहिए

अब हम बात करते है यमुनोत्री में रुकने और खाने की क्या व्यबस्था है तो इसके लिए आपको जानकी चट्टी में उत्तराखंड राज्य की तरफ से गेस्ट रूप  बनाये गए जहाँ आप ठहर सकते है इसका चार्ज बहुत कम होता है ।

प्राइवेट होटल की बात करे तो जानकी चट्टी पास काफी होटल मिल जायेंगे जो 500 रूपए से 5 हजार तक किराया होता है आप अपने बजट के अनुसार बुकिंग कर सकते है ।

यमुनोत्री में खाने के लिए हर प्रकार की थाली सुबिधा मिल जाती है जो साउथ इंडियन नार्थ इंडियन के अलाबा हर प्रकार की भोजन थाली की ब्यवस्था है जिनका चार्ज 150 रूपए से 200 रूपए होता है जो बहुत स्वादिष्ट होता है ।

यमुनोत्री के आस पास घूमने बाली जगह

यमुनोत्री मंदिर दर्शन के बाद चाहे तो मंदिर से 1 किलोमीटर आगे छोटा ग्लेशियर में ट्रैकिंग करने जा सकते है आज कल के युबाओ के बीच काफी फेमस ग्लेशियर ट्रैकिंग है ।

  • सप्तऋषि कुंड – माँ यमुना नदी का उद्गम स्थल इसी कुंड से होता है लेकिन यहाँ तक पहुंचना काफी मुश्किल होता क्योकि रास्ता बहुत खतरनाक होने कारण साथ में ग्लेशियर की बजह से बहुत कम ही लोग इस कुंड तक पहुँच पाते है ।
  • सूर्यकुंड – इस कुंड में श्रद्धालु माँ यमुना को भोग लगाने चाबल को कपडे की पोटली में बांधकर इस कुंड के गर्म पानी में डालदेते है और पकने के बाद इसे प्रसाद के रूप में अपने साथ घर ले जाते है ।
  • हनुमान चट्टी – यमुनोत्री के रास्ते में पड़ने बाले इस मंदिर के पास ही गंगा और यनुमा का अद्भुत मिलान होता है । चाहे तो यहाँ भी दर्शन के लिए जा सकते है .
  • खरसाली – सर्दियों के मौसम में यमुना की पूजा खरसाली में ही की जाती है क्योंकि यमुनोत्री के रास्ते और मंदिर बर्फ से पूरी तरह से ढँक जाते है ।

FAQ – यमुनोत्री यात्रा के बारे में पूछे जाने बाले प्रश्न ?

यमुनोत्री किस पर्वत में है ?

पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुनोत्री असिति ऋषि का निवास स्थान था जहाँ पर बैठ कर उन्होंने हजारो बर्षो माँ यमुना की तपस्या किये थे जिन्होंने अपने बृद्धावस्था के दौरान कालिंदी पर्वत में स्थित सप्तऋषि कुंड में स्नान करने के लिए नहीं जा पाए उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ यमुना उन्ही की कुटिया से प्रकट हो गयी और उसी दैवीय स्थान को यमुनोत्री धाम के नाम से जाना जाता है ।

यमुनोत्री में किसकी पूजा होती है ?

यमुनोत्री धाम में माँ यमुना नदी की पूजा होती है जो हिन्दुओं की प्रमुख देवियो में से एक है और इनका विवाह भगवान श्री कृष्ण से हुआ था ।

निष्कर्ष –

दोस्तों आज के इस लेख में हमने यमुनोत्री धाम की यात्रा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी बताई है जैसे यमुनोत्री कैसे पहुंचे , रुकने और खाने की क्या व्यवस्था है , यमुनोत्री यात्रा कब जाये , और साथ में यमुनोत्री की यात्रा कैसे करे पूरी जानकारी ।

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