उज्जैन घूमने के प्रसिद्द स्थान

पुराणों में सप्तपुरी यानी 7 मोक्षदायनी  का वर्णन है उसमे उज्जैन मंदिर भी शामिल है यह जगह भक्तो और धार्मिक लोगो को घूमने एवं ज्ञान के  ज्ञिज्ञासो  का नगर था वो लगभग भारत की दूसरी काशी की तरह है 

प्राचीन  काल में उज्जैन में हजारो मंदिर स्थापित किये गए थे इसीलिए उज्जैन को मंदिरो की भी नगरी कहा जाता है

यहाँ महाकाल ज्योतिर्लिंग के अलाबा 84 लिंगो में से महादेव अलग अलग रूपों में मौजूद है  । संध्या आरती के समय लाखो पक्षी महा काल के पास लगे पेड़ में एकत्रित होते है और आरती की भव्यता पर चार चाँद लगते है ।

उज्जैन महाकाल की नगरी :-  यह मध्यप्रदेश का ऐतिहासिक शहर है  महाकालेश्वर मंदिर भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर ही  है जहा 12 वर्ष  में विशाल कुम्भ का आयोजन किया जाता है ।

 राजा विक्रमादित्य की राजधानी उज्जैन हुआ करती थी

उज्जैन में घूमने के प्रसिद्द स्थान । उज्जैन में कौन – कौन से मंदिर है ?

हमारे भारत में बहुत से धार्मिक नगरी है लेकिन उज्जैन में  सबसे बड़े धार्मिक मेले का आयोजन होता है और वो होता है कुम्भ मेला कुम्भ मेला केवल 4 शहरो में होता है । उन चार शहरो में से एक उज्जैन है ।

दोस्तों आईये अब हम जानते है उज्जैन के प्रमुख मंदिर के बारे में –

1- महाकालेश्वर मंदिर

उज्जैन का सबसे प्रसिद्द और धार्मिक मंदिर महाकाल मंदिर  हिन्दू धर्म की पावन पवित्र स्थान है और यहाँ 12 बर्ष में कुम्भ का आयोजन किया जाता है ।

भगवान्  शंकर का पूरे पृथ्वी में केवल एक ही शिवलिंग है जिसका मुखौटा दक्षिण दिशा की ओर है दक्षिण दिशा काल अर्थात समय उस काल  के ऊपर जो नियंत्रण करता है वो महाकाल है  उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास से ही क्षिप्रा नदी  बहती है ।

महाकालेश्वर का रहस्य  :-

दूसन दैत्य का वद्द  करने के लिए और उसके कोक से एक ब्रह्ममण बालक को बचाने के लिए भगवान् शिव स्वयं उज्जैन में  प्रकट हुए थे दूसन और उसकी सेना समेत सभी को भगवान शिव ने  नष्ट कर दिए था ।

तब उस बालक के निवेदन पर महाकाल ने हमेशा के लिए उज्जैन में उस बालक के पास रहने का निश्चय किया और तब से ज्योतिर्लिंग के स्वरुप में स्थित हो गए ।

भगवान् शिव  देश भर में 12 स्थानों पर ज्योतिर्लिंग के रूप में  विराजमान है इन्ही में से एक ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्व गृह में स्थापित है

संध्या काल का सुन्दर चित्रण कालिदास ने अपने लेख में इस प्रकार किया है :- हे  मेघ जब तुम उज्जैनी जाना तो महाकाल के दर्शन अवश्य करना वहा की संध्या आरती को अवश्य देखना।

प्रातः काल भष्म आरती के बाद दही और चावल का भोग लगाया जाता है दोपहर 10 बजे भोग आरती होती है शाम 5 बजे महाकाल का पूजन श्रृंगार होता है जिसमे महाकाल को भांग समर्पित की जाती है उसके बाद से जल चढ़ना बंद हो जाता है ।

शाम सात बजे संध्या भोग आरती  की जाती है शंध्या काल के दौरान तेज नगाड़े ,ढोल और घंटियों के साथ महाकाल का वंदन किया जाता है  जो संध्या आरती होती है उसका दृश्य  ऐसा लगता है की राजा का मनोरथ हो रहा है ।

2- काल भैरव मंदिर उज्जैन 

उज्जैन में ही पड़ता है काल भैरव मंदिर महाकाल के दर्शन करने के बाद दर्शनार्थी चल पड़ते है है अपने अगले पड़ाव की तरफ जहा उन्हें मिलता है काल भैरव के दर्शन ।

उज्जैन के इस मंदिर की मान्यता है की जब तक यहाँ काल भैरव नाथ में दर्शनार्थी शराब नहीं चढ़ाते तब तक उनकी पूजा अर्चना पूर्ण नहीं होती इसीलिए इस टेम्पल में भगवान को खुश करने  के लिए शराब चढ़ाई जाती है ।

3- मंगल नाथ टेमल

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंगल गृह को उज्जैन यानी अवंतिका का जन्म भूमि मना गया है ऐसा माना जाता है की मंगलनाथ मंदिर के ठीक ऊपर आकाश में मंगल गृह स्थित है ।

यही  84 महादेव  में से 43 वे महादेव अंगेस्वार मंदिर है –

4- अंगेश्वर महादेव मंदिर 

महाकालेश्वर मंदिर से 5 किलोमीटर की दूरी पर तथा मंगलनाथ टेम्पल के पास में स्थित है अंगेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है की यह मंगल गृह का उल्का पिंड है ।

इस मंदिर में मंगल  दोष के निवारण के लिए पूजा अर्चना भी की जाती है देश भर के श्रद्धालु यहाँ विशेष पूजन के लिए आते है । और अपने दुखो और पापो को दूर करने के लिए श्रद्धालु यहाँ आते है ।

5- चौसठ योगिनी मंदिर 

हिन्दू पौराणिक में चौसठ देवी का विशेष महत्त्व माना जाता  है यहाँ आपको प्राचीन प्रतिमाये देखने को मिलेगी यदि आप प्राचीन मंदिरो को देखने के शौकीन है तो इस मंदिर को देखने अवश्य जाये ।

इस मंदिर में देवी के चौसठ अलग अलग अवतार की प्रतिमाये विराजमान है ।

6- गढ़कालिका मंदिर

माना जाता है कालिदस गढ़कालिका के बहुत बड़े भक्त थे इस मंदिर का निर्माण  606  ईस्वी में सम्राट हर्ष के द्वारा करवाया गया था लेकिन इस मंदिर की प्रतिमा को सतयुग से जोड़ा जाता है  इससे पहले भी इस स्थान पर देवी का मंदिर हुआ करता था ।

ऐसा माना जाता है की आज के समय में जिस जगह पर गढ़कालिका मंदिर है वह पर प्राचीन समय में अवंतिका नगरी हुआ करती थी ।और वही से उज्जैन शुरू होता है ।

7- भृतहरी गुफा

गढ़कालिका मंदिर के पास में ही क्षिप्रा नदी के किनारे उज्जैन शहर का एक और घूमने का स्थान पड़ता है जो भृतहरि राजा विक्रमादित्य के बड़े भाई थे

जिन्होंने अपना सुख त्याग कर सन्याशी का रूप धारण कर लिए थे और वो काफी विद्वान थे । इस गुफा के दक्षिण दिशा से प्रवेश होता है ये गुफा 2 भागो में बटा  हुआ है।

यहाँ की जो दूसरी गुफा है तो वो हमेशा बंद रहती है मना जाता है की भ्रिथारी की दूसरी गुफा उज्जैन से (काशी )वनारस तक जाती है 

8- संदीपनी आश्रम

उज्जैन शहर में ही बसा हुआ इस आश्रम को हिन्दू पौराणिक कथाओ में वर्णन मिलता है  महाभारत के अनुसार इस जगह पर ऋषि संदीपनी  ने भगवान्  श्री कृष्ण , उनके बड़े भाई बलराम और सुदामा को शिक्षा प्रदान किया था ।

वर्त्तमान में यह आश्रम मंदिर में परवर्तित हो चूका है जो ऋषि सांदीपनि को समर्पित है इसके साथ साथ पर्यटक यहाँ गोमती कुंड को भी देख सकते है ।

9- चिंतामन गणेश मंदिर 

इस मंदिर में इक्छा मन , चिंतामन , और चिंताहरण गणेश के नाम से 3 प्रतिमाये स्थापित की गयी है ।स्थानीय लोगो के अनुसार यहाँ पर गणेश की प्रतिमा प्रकट हुयी है  इस मंदिर में गणेश जी के प्रतिमा का आकर भव्य है

इस मंदिर में सुबह और संध्या आरती वंदन भक्तो को भक्ति भावना में लीन कर देती है । उज्जैन में स्थानीय लोगो की मानयता है की हर शुभ कार्य करने से पहले यहाँ सबसे पहला निमंत्रण बाटने की प्रथा है 

10- इस्कॉन टेम्पल 

 भारत में चुंनिंदा स्थानों में इस्कॉन टेम्पल का निर्माण किया गया है यह मंदिर राधा कृष्ण के प्रेम की निसानी है मंदिर में राधा किशन और कृष्ण को गोपियों के साथ प्रतिमा स्थापित है ।

11- हरषिदी माता मंदिर 

रूद्र सागर झील के निकट स्थित यह मंदिर भी उज्जैन के धार्मिक पर्यटकों का पसंदीता स्थान है कहा जाता है 2 राक्षसों का बद्ध करने के लिए देवी पारवती ने हरसिद्धि माता का रूप धारण किया था ।

तब से इस स्थान पर माता पारवती की प्रतिमा विराजमान है ।

इन सभी भव्य मंदिरो की नक्काशी देखकर दर्शनार्थी मंत्र मुग्ध हो जाते है जो महाकाल की नगरी अवंतिका यानि उज्जैन में पूर्ण श्रद्धा भाव से अपनी कोई अविलाषा लेकर महाकाल के दर्शन को आता है उसकी मनोकामना महाकाल जरूर पूरी करते है ।

उज्जैन में कौन सी नदी बहती है

भारत में नदियों को देवी माँ का रूप माना  जाता है इसी प्रकार उज्जैन से बहती हुयी क्षिप्रा नदी उन्ही पवित्र नदियों में आती है इसका पानी अमृत के सामान माना जाता है ।

त्रेता युग में भगवान् राम अपने पिता की अस्थियो  को क्षिप्रा नदी में ही विषर्जित किया था इसीलिए कहा जाता है की क्षिप्रा नदी भगवान् व्रिष्णु के  ह्रदय से निकलती है ।

उज्जैन में रात कोई क्यों नहीं रुकता

यहाँ की ऐसी मान्यता है की यहाँ कोई राजा आधुनिक युग के प्रधान मंत्री या मुख्यमंत्री रात्रि के समय महाकाल में विश्राम नहीं करते क्योकि महाकाल ही स्वयं ब्रह्माण्ड के राजा है ।

जब किसी सत्ताधारी ने यहाँ रुकने की कोशिश की है तब वो अपनी सत्ता गवाई  है या फिर भारी नुकशान का सहन करना पड़ा है इसी बजह से कोई भी सत्ताधारी रात्रि के समय उज्जैन नगरी में नहीं रुकते ।

उज्जैन कैसे पहुंचे

महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचने के लिए वाया -बस, ट्रैन और हवाई यात्रा इनमे से किसी की यात्रा कर के यहाँ पंहुचा जा सकता है ।

यहाँ तक पहुंचने के लिए – सबसे पहले इंदौर शहर जाना पड़ेगा इंदौर से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन है जहा पहुंचकर भक्त महाकाल के दर्शन पा सकते है ।

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FAQ-उज्जैन के बारे में सबसे ज्यादा पूछे जाने बाले सवाल

उज्जैन में कौन सी नदी बहती है ?

क्षिप्रा नदी -त्रेता युग में भगवान् राम अपने पिता की अस्थियो  को क्षिप्रा नदी में ही विषर्जित किया था इसीलिए कहा जाता है की क्षिप्रा नदी भगवान् व्रिष्णु के  ह्रदय से निकलती है ।

उज्जैन में रात कोई क्यों नहीं रुकता ?

क्योकि महाकाल ही स्वयं ब्रह्माण्ड के राजा है ।
जब किसी सत्ताधारी ने यहाँ रुकने की कोशिश की है तब वो अपनी सत्ता गवाई  है या फिर भारी नुकशान का सहन करना पड़ा है इसी बजह से कोई भी सत्ताधारी रात्रि के समय उज्जैन नगरी में नहीं रुकते ।

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