महाकाल के दर्शन कैसे करे – यहां होते हैं 5 तरह के दर्शन आप भी जानिए

देवों के देव, यानी महादेव के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर धाम को महाकाल के नाम से जाना जाता है यह मंदिर विश्व के सात प्राचीन शहरों में से एक अवंतिका (वर्तमान में इसका नाम उज्जैन है) में स्थित है जो मध्य प्रदेश का जिला है इसकी दूरी इंदौर से 50 और भोपाल से 300 किलोमीटर है।

दोस्तों यदि आप महाकालेश्वर जा रहे हैं और जानना चाहते हैं महाकाल के दर्शन कैसे करें तो वहां के नियम जानना बेहद आवश्यक है क्योंकि प्रतिदिन हजारों लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ इकट्ठा होती है । इससे संभव नहीं होता एक लाइन में खड़े होकर सब लोग दर्शन कर पाए इसीलिए यहां 5 अलग-अलग दर्शन के नियम बनाए गए है जिन्हें आप फॉलो करते हैं तब आपको पूरी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना और भस्म आरती दर्शन में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।

  1. बिल्कुल फ्री दर्शन
  2. ₹250 वाला
  3. भस्म आरती दर्शन
  4. ₹1000 वाला दर्शन दर्शन
  5. ₹1500 वाला दर्शन

महाकाल के दर्शन कैसे करे ?

1. महाकाल का फ्री दर्शन कैसे करें ?

फ्री शब्द से ही पता चलता है की बिना शुल्क बाले दर्शन की बात हो रही है जो वास्तव में सच है इसमें श्रद्धालुओं को लंबी लाइन से गुजरना होता है जिसमें लगभग डेढ़ घंटे का समय लग जाता है लेकिन इसमें भक्तों को शिव लिंग के दूर से ही लगातार बढ़ती हुई लाइन के साथ दर्शन कराने का प्रावधान है।

2. ₹250 वाला कैसे होता है ?

दोस्तों ₹250 वाले दर्शन में भक्तों को अलग से दूसरे गेट से अंदर ले जाया जाता है जिसमें भीड़ कम होती है जहां पर आपका नंबर जल्दी आ जाता है।

3. महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन कैसे करें ?

सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन भगवान शिव को जले हुए शव की राख अर्पण करने की प्रथा है जिसके बाद ही जलाभिषेक किया जाता है जिसे भस्म आरती कहते हैं

इसे देखना हर किसी के नसीब में नहीं होता जिसके ऊपर भोलेनाथ की अपार कृपा होती है केवल वही व्यक्ति इस दिव्य दरबार में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त करता है।

इसमें केवल पुरुष श्रद्धालुओं को शामिल होने की अनुमति दी जाती है यदि भक्त आरती को देखने के साथ-साथ शिवलिंग में जलाभिषेक करना चाहता है तो केवल वही लोग कर सकते हैं जो धोती कुर्ता वस्त्र धारण किए हैं।

महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है जिसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प मौजूद हैं।

  • अगर आप भस्म आरती दर्शन की ऑनलाइन बुकिंग कराना चाहते हैं तो 10 से 12 दिन पहले ही महाकालेश्वर मंदिर की ऑफिशल वेबसाइट से निर्धारित शुल्क जमा कर आसानी से स्वयं कर सकते है .
  • यदि आप ऑफलाइन बुकिंग कराना चाहते हैं तो उसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता पर जैसे ही सुबह 7:00 बजे काउंटर खुलता है उससे पहले ही लाइन में लगकर टिकट ले सकते हैं. इसमें शामिल होने के लिए 1 दिन पहले ही टिकट निकलवाना होता है.
  • भस्म आरती का समय सुबह 4:00 बजे है इसीलिए लोग एक 2:00 बजे रात में अंदर जाकर बैठ जाते हैं.

4. ₹1500 वाला दर्शन

इस दर्शन में भक्त गणों को मंदिर के गर्भ गृह यानी जहां शिवलिंग स्थापित है वहां 5 लोगों के ग्रुप में ले जाया जाता है जहां पूरे विधि विधान के साथ प्रसाद, फूल, माला चढ़ा सकते हैं ।

महाकालेश्वर कैसे जाएं ?

इंदौर पहुंचना बेहद आसान है क्योंकि यह देश के प्रमुख शहर इंदौर से मात्र 55 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है , वैसे तो उज्जैन में रेलवे स्टेशन है लेकिन यदि आपके शहर से यहां तक के लिए डायरेक्ट ट्रेन नहीं है तो इंदौर या भोपाल पहुंचकर उज्जैन के लिए रेलगाड़ी पकड़ सकते हैं,

उज्जैन का नजदीकी एयरपोर्ट अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इंदौर है जो कि महाकालेश्वर मंदिर से 57 किलोमीटर दूर है।

FAQ-

महाकाल मंदिर कहां है.

यह मंदिर विश्व के सात प्राचीन शहरों में से एक अवंतिका (वर्तमान में इसका नाम उज्जैन है) में स्थित है जो मध्य प्रदेश का जिला है इसकी दूरी इंदौर से 50 और भोपाल से 300 किलोमीटर है।

उज्जैन कब जाना चाहिए ?

वैसे तो महाकालेश्वर मंदिर हर मौसम में दर्शनीय है परंतु वास्तव में महाकाल के दर्शन का सबसे अच्छा समय श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दिन विशेष शुभ माना जाता है इसी समय कांवरिया यात्रा करते हुए लोग भारी संख्या में आते हैं.

महाकालेश्वर मंदिर खुलने का समय 2022-23 ?

यह मंदिर प्रतिदिन प्रातः काल 4:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है लेकिन सावन महीने में अपार संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं जिसके कारण मंदिर 2 घंटे पहले ही खुल जाता है और निरंतर 11:00 बजे रात तक खुला रहता है.

महाकालेश्वर की यात्रा पूर्ण कब मानी जाती है ?

ज्यादातर यात्री जानकारी के अभाव में केवल महाकाल दर्शन के बाद ही वापस लौट आते हैं लेकिन जिस तरीके से वैष्णो देवी दर्शन के बाद भैरवनाथ जाने की परंपरा है ठीक उसी तरह महाकाल दर्शन के बाद काल भैरव मंदिर में जाना अनिवार्य है तभी उज्जैन यात्रा संपूर्ण मानी जाती है।

आशा करता हूं आपको महाकाल दर्शन कैसे करें ? की संपूर्ण जानकारी मिल गई होगी इसी तरह भारत के विभिन्न शहरों तथा तीर्थ यात्रा की जानकारी पाने के लिए हमारे वेबसाइट के साथ जुड़े रहे.

आपकी यात्रा मंगलमय हो

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