ऐसे करे गंगोत्री धाम की यात्रा – पूरी जानकारी

दोस्तों इस लेख में आज हम बात करने बाले है गंगोत्री धाम की यात्रा कैसे करे , गंगोत्री कब जाये , कैसे जाये , और गंगोत्री में रुकने और खाने पीने की क्या व्यबस्था है साथ में गंगोत्री दर्शन कैसे करे सम्पूर्ण जानकारी के लिए आपसे अनुरोध है लेख को पूरा पढ़े ।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिला में स्थित गंगोत्री से माँ गंगा नदी का उद्गम होता है जो उत्तराखण्ड के चार धामों में से एक है यहाँ से निकलकर गंगा नदी ऋषिकेश में पहली बार पहाड़ो को छोड़कर मैदानी स्थल में प्रवेश करती है।

और आगे जाने पर प्रयागराज (इलाहबाद) में गंगा यमुना और सरस्वती इन सभी नदियों का संगम होता है जो यमुना नदी का सफर प्रयागराज से समाप्त हो जाता है क्योंकि यमुना नदी गंगा में मिलकर आगे का सफर जारी रखती है जो 2500 किलोमीर का लम्बा रास्ता तय करते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है ।

लाखो करोडो श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र गंगोत्री धाम में देश से ही नहीं बल्कि विदेशो से भी हर बर्ष भारी संख्या में माँ गंगा के दर्शन के लिए श्रद्धालु गंगोत्री यात्रा पहुंचते है ।

गंगोत्री धाम में बहुत ज्यादा ठण्ड पड़ती है इसीलिए अपने साथ में गर्म कपडे अवश्य रखे ।

गंगोत्री यात्रा कैसे पहुंचे

अब बात आती है गंगोत्री यात्रा के लिए कैसे पहुंचे तो यहाँ कोई रेलवे या एयरपोर्ट नहीं है कारण यह है की गंगोत्री धाम का रास्ता ऊँचे ऊँचे पहाड़ो में होकर गुजरता है जिसकी बजह से रेलवे संभव नहीं है ।

लेकिन हरिद्वार और ऋषिकेश पास होने की बजह से इसकी कोई महसूस नहीं होती

बया ट्रैन – गंगोत्री धाम तक पहुंचने के लिए आप चाहे जिस भी राज्य या शहर से आ रहे सबसे पहले आपको हरिद्वार या फिर ऋषिकेश पहुंचना होगा जहाँ पर भारत के सभी बड़े शहरो से ट्रेनों का आवागमन होता है यदि आपके शहर से हरिद्वार के लिए ट्रैन नहीं है तो दिल्ली आकर यहाँ के लिए ट्रैन पकड़ सकते है ।

जब आप यहाँ तक पहुंच जाते है तो स्टेशन के बहार आपको गंगोत्री जाने बाली बस लगी रहती है जिनका दिनभर आवागमन होता रहता है जो आपको गंगोत्री बस स्टैंड में पंहुचा देंगे ।

हवाई यात्रा यदि आप हवाई यात्रा के माध्यम से गंगोत्री पहुंचना चाह रहे है तो देहरादून एयरपोर्ट तक फ्लाइट पकड़ कर पहुंच सकते है उसके आगे का सफर बस या टैक्सी से करनी पड़ेगी जो गंगोत्री से महज 241 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है है ।

एयरपोर्ट के बाहर से देहरादून बस स्टॉप के लिए टैक्सी मिल जाएगी वहां से सारा दिन गंगोत्री , यमुनोत्री , केदारनाथ , और बद्रीनाथ के लिए बसों का सञ्चालन होता रहता है ।

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गंगोत्री यात्रा जाने का सबसे अच्छा समय

आप में से बहुत से लोगो को पता होगा की गंगोत्री धाम में हमेशा सर्दियों का मौसम रहता है में यानि की दीपावली के बाद यहाँ भारी मात्रा में बर्फ़बारी होती है जिसकी बजह से रास्ते और मंदिर पूरी तरह से बर्फ से ढंक जाते है ।

  • गंगोत्री यात्रा पर जाने के लिए सबसे अच्छा समय सितम्बर से ऑक्टूबर का होता है क्योंकि इस समय ज्यादा भीड़ भाड़ का माहौल नहीं रहता जिससे यहाँ ठहरने और खाने पीने की व्यबस्था भी अच्छी रहती है वो भी कम बजट में ।
  • लेकिन यदि आप मई जून के महीने में जाते है तो आपको गंगोत्री दर्शन के लिए घंटो लाइन में लग्न पड़ेगा और साथ में होटल और खाने की वस्तुए तीन गुना तक बढ़ जाती है ।
  • अगर हम यही जून और जुलाई की बात करे तो यहाँ भरी बारिस होती रहती है जिससे यात्रा में बाधा डाल देती है जिससे यात्रा का उतना आनंद नहीं आ पता .

इसीलिए सितम्बर और ऑक्टूबर माह में गंगोत्री जाने के लिए सबसे अच्छा समय होता है

गंगोत्री में सर्दियों के मौसम में ज्यादा बर्फ़बारी की बजह से गंगा की पूजा गंगोत्री मंदिर से 20 किलोमीटर दूर मुखवा नमक गांव में की जाती है।

गंगोत्री मंदिर कब खुलता है ?

सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार अप्रैल मई के महीने में अक्षय तृतीया के दिन माँ गंगा को डोली में बैठकर मुखबा गांव से बड़े धूम धाम से गंगोत्री लाया जाता है पौराणिक कथाओ में अनुसार इसी दिन को भगीरथ जी ने माँ गंगा जी को धरती लोक में लाये थे ।

  • गंगा जी का धाम गंगोत्री मंदिर हर साल अक्षय तृतीया यानि अप्रैल मई के मध्य खोला जाता है जो अलगे 6 माह तक के लिए यानि ऑक्टूबर नवंबर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिर का कपाट अगले 6 माह तक के लिए पुनः बंद कर दिया जाता है ।
  • सर्दियों में गंगोत्री , यमुनोत्री , बद्री नाथ और केदारनाथ यानि उत्तराखंड के चारधाम ६माह के लिए इन मंदिरो का कपाट बन कर दिया जाता है इसका कारण यह है की ऑक्टूबर के बाद इन सभी तीर्थ स्थलों में काफी बर्फ़बारी होती है जिसकी बजह से मंदिर और रास्ते पूरी तरह से बर्फ से ढँक जाते है ।

गंगोत्री धाम में रुकने और खाने की क्या व्यबस्था है ?

गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं को रुकने के लिए हर्षिल नामक एक जगह है जो गगोत्री मंदिर से 25 किलोमीटर पहले पड़ता है यहाँ बड़े बड़े होटल रेस्टोरेंट मिल जायेंगे जो 500 से 5000 तक एक रात का किराया चार्ज करते है आप अपने बजट के हिसाब से बुक कर सकते है ।

हर्षाली से 5 किलोमीटर आगे जाने पर मुखबा गांव पड़ता है जहाँ गनोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के बाद गंगा माँ की शीतकालीन पूजा अर्चना की जाती है

दूसरा रुकने के लिए सस्ता और अच्छा बिकल्प है गंगोत्री पहुंचकर पास में ही बहुत सारे होटल और लाज मौजूद है जो काफी सस्ते चार्ज में मिल जाते है इनका किराया 300 से लेकर 1000 तक होता है

गंगोत्री दर्शन कैसे करे

जब आप गंगोत्री पहुंच जाते है तो दर्शन करने से पहले श्रद्धालुओं को स्नान करने की सदियों से परंपरा है जिसे निभाना पड़ता है गंगा मंदिर के बगल से भागीरथी नदी बहती है वही पर उत्तराखंड राज्य द्वारा घाट बनाये गए है जहाँ ठन्डे बर्फीले पानी में नहाने के बाद भक्त लाइन में लग जाते है।

मंदिर के पास में ही भागीरथी शिला मौजूद है इसके बारे में कहते है की भागीरथी जी ने अपने पूर्बजों के उद्धार के लिए इसी शिला में बैठ कर माँ गंगा की तपस्या करते थे ।

जिनसे प्रसन्न होकर गंगा जी धरती लोग में प्रकट हुयी इसीलिए गंगा नदी को भारत की सबसे पवित्र नदी का दर्जा दिया जाता है।

यदि आप दर्शन के लिए सुबह पहुंच जाते है तो आपको गंगा जी की भव्य आरती में शामिल होने का मौका मिल जायेगा

गंगा मंदिर से 18 किलोमीटर ऊँचे ग्लेशियर में स्थित गौ मुख से गंगा का उद्गम होता है जो ग्लेशियर के पिघलने की बजह से होता है लेकिन वहा का रास्ता ख़राब और बहुत ठण्ड होने की बजह से बहुत कम ही दर्शनार्थी पहुंच पाते है।

गौमुख तक ट्रैकिंग करने के लिए उत्तरकाशी में स्थित SDM ऑफिस से परमिशन लेनी पड़ती है जो की एक दिन में केबल 150 यात्रियों को जाने के लिए परमिशन दी जाती है ।

गंगोत्री यात्रा का खर्च

गंगोत्री के सफर में 2 हजार कम से कम लग जायेंगे जो यहाँ 1 दिन रुकने और खाने के साथ हरिद्वार से यहाँ तक पहुंचने और वापस हरिद्वार लौटने तक आपके कम से कम 2 हजार रूपए के खर्च में आपकी गंगोत्री यात्रा पूरी हो जाएँगी लेकिन आप जिस शहर से आ रहे वहां से हरिद्वार तक का खर्च हम इसमें नहीं जोड़ रहे है ।

गंगोत्री धाम की यात्रा कितने दिन की होती है

दोस्तों गंगा की यह यात्रा हरिद्वार से गंगोत्री पहुंचने और दर्शन करके वापस हरिद्वार रेलवे स्टेशन तक के लिए 3 दिन आपके पास होने चाहिए क्योंकि एक दिन हरिद्वार से गंगोत्री जाने के लिए और एक दिन रुककर गंगोत्री दर्शन करने के लिए और वापस लौटने के लिए 1 दिन का समय होना चाहिए ।

अगर आप गंगोत्री में नहीं रुकना चाहते तो ये सफर आपका केबल 2 दिन का ही रहेगा लेकिन यात्रा के दौरान आप बहुत ज्यादा थके हुए होंगे जिससे 1 दिन गंगोत्री में आपको जरूर रुकना चाहिए ।

गंगोत्री के आस पास घूमने की जगह

जब आप गंगोत्री यात्रा के लिए निकले तो रास्ते में पड़ने बाले ये प्रमुख पर्यटन स्थलों को लौटते समय घूम सकते है और यहाँ की सुन्दर वादियों में कुछ समय बिता कर जीवन के यादगार लम्हो में शामिल कर सकते है ।

1. गौमुख

गंगा मंदिर में दर्शन करने के बाद चाहे तो गौमुख की 18 किलोमीटर की यात्रा करते हुए ग्लेशियर में ट्रैकिंग करते हुए गंगा नदी के उद्गम स्थल तक पहुंच सकते है जो प्रकृति के खूबसूरती में बसा हुआ है ।

2. सूर्य कुंड

जैसा इसका नाम वैसा ही ये धाम है यहाँ जगह जगह पर प्रकृति अपना रंग बिखेरती है इस कुंड की खासियत यह है की इतनी ज्यादा ठण्ड बाली जगह गंगोत्री और साथ में ग्लेशियर पिघलता रहता है उसके बाबजूद भी सूर्य कुंड में बहुत ज्यादा गर्म पानी निकलता है जहा दर्शन से पहले श्रद्धालु इस कुंड में जाते है ।

3. गंगनानी

गंगनानी से मौसम का वातावरण बदलने लगता जो ठंडी हवाओं के साथ सर्दियों का अहसास दिलाने लगता है यहाँ से गंगोत्री के लिए जैसे जैसे आगे बढ़ेंगे वैसे वैसे ठण्ड बढ़ती जाती है चाहे तो यहाँ रुककर परासर रही के मंदिर में दर्शन करने जा सकते है ।

4. हरिशील घाटी

गंगनानी से 30 किलोमीटर आगे चलने पर सेव के बागानों के लिए प्रसिद्द हर्षिल आता है और यहाँ से बर्फ से लदी हुयी चोटियां साफ दिखाई पड़ती है जिन्हे पहली बार देखकर यात्री काफी आनंदित होते है ।

वैसे तो गंगोत्री का पूरा सफर ही बर्फीले पहाड़ और सुन्दर वादियों से होकर गुजरात है लेकिन गंगा मंदिर से 25 किलोमीटर पहले ही हर्षिल घाटी पड़ती है चाहे तो लौटते समय इस सुहावनी बर्फीली घाटी में ट्रैकिंग का आनंद उठा सकते है और साथ साथ यहाँ के झरने भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते है ।

5. मुखबा

हर्षिल से 5 किलोमीटर आगे चलने पर मुखबा गँवा पड़ता है जहा शीतकालीन में गंगोत्री मंदिर का कपाट बंद होने के बाद माँ गंगा की पूजा की जाती है ।

6. भैरव घाटी

हर्षिल से 16 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद भैरव घाटी पड़ती है जहां पर भैरव बाबा का मंदिर है और यहाँ से गंगोत्री मंदिर की दूरी केवल 8 किलोमीटर है ।

निष्कर्ष

दोस्तों इस लेख में हमने जाना गंगोत्री की यात्रा कैसे करे , गंगोत्री कब जाये , कैसे जाये और कहाँ रुके इन सब बातो को ध्यान में रखते हुए इस लेख में पूरी जानकारी बताई गयी है ।

अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे और यदि कोई सबाल हो तो कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है जिसका जबाब आपको जरूर मिलेगा ।

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