चित्रकूट यात्रा और तीर्थ स्थल की पूरी जानकारी

नमस्कार मेरे प्रिय पाठको इस लेख में आपको भगवान राम वनवास नगरी चित्रकूट यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी बताई गयी गई है जैसे- चित्रकूट धाम की यात्रा कैसे करे ? चित्रकूट कब जान चाहिए ? चित्रकूट में रुकने और खाने की क्या व्यबस्था है? और चित्रकूट में घूमने की जगह कौन कौन सी है ? इन सभी सबालो के जबाब आपको अंत तक मिल जायेंगे ।

चित्रकूट नगरी मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा में बसा यह पवित्र स्थान hai जो की 38 .2 बर्ग किलोमीटर में  फैला हुआ है।

यह स्थान (up के बाँदा जिला में और mp के सतना जिला के मध्य बसा हुआ है )। चित्रकूट धाम  का नाम रामायण काल से जुड़ा हुआ है

तथा यहाँ  पर ऋषि अत्रि और माता अनुशिया निवास करते थे चित्रकूट की व्याख्या पूरी दुनिया में  बिख्यात है।

चित्रकूट में घूमने की जगह । chitrakoot darshan

पौराणिक कथाओ के अनुसार जब भगवान् राम सीता अपने अनुज लक्ष्मण समेत बनबास 14 बर्षो के वनवास के 11 बर्ष यही पर बिताये थे वो सभी जगह इस प्रकार है –

1. राम घाट- 

चित्रकूट में मन्दाकिनी नदी के पश्चिमी दिशा को राम घाट के नाम से जाना जाता है यह स्थान अपने आप में इतना अलौकिक है की दर्शनार्थियों को अपने तरफ आकर्षित कर लेता है ।

राम घाट चित्रकूट के सबसे पवित्र  स्थान में से एक  माना जाता है इसके बारे में कहा जाता पौराणिक कथा मिलती है जिसमे लिखा गया है की भगवान राम यही पर स्नान किया करते थे इसीलिए यह घाट श्रद्धालुओं के लिए बहुत ही पबित्र माना  जाता है।

2. गुप्त गोदावरी –

गुप्तगोदावरी चित्रकूट दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण स्थान इसलिए भी है क्योंकि श्री राम जी के चिटकूट आगमन की जानकरी पाकर महर्षि गौतम की पुत्री गोदावरी नाशिक से गुप्तरूप से भूमिगत मार्ग से होकर यहाँ आकर प्रकट हुई थी इस कारण  इस गुफा को गुप्त गोदावरी नाम मिला था ।

प्रकृति और आध्यात्म के साथ साथ अपने ईश्वरीय महत्ता के कारण गुप्त गोदावरी धाम चित्रकूट के प्रसिद्धः पर्यटन में श्रेस्ट माना जाता है ।

ऐसा  मान्यता है की भगवान्  श्री राम के 14 बर्षो के बनबास के पहले ही देवताओ ने इस दैवीय  गुफा का निर्माण किया था। गोदावरी गुफा का रास्ता बहुत ही ज्यादा सकरा है –

जब आप गुफा के अंदर प्रवेश  करेंगे तो आप अचानक एक नयी दुनिया में प्रवेश कर जायेगे आपको अनुभव होगा की ये बाकई कोई दैवीय और कोई सिद्ध जगह है ।

गुप्त गोदावरी की कहानी

चित्रकूट नगर  से 18 किलोमीटर दूर गुप्तगोदावरी  चित्रकूट की सुंदरता को और बढ़ा देती है कहते है की ऋषि गौतम की पुत्रीगोदावरी प्रभु राम के बनबास का जैसे ही गोदावरी को पता लगी।

तो उन्होंने नाशिक से भूमिगत मार्ग से चलकर चित्रकूट में आकर दर्शन देती है और इसके बाद पुनः  से लुप्त हो जाती है । गुप्त  गोदावरी में 2 गुफाये है गुफा के अंतिम छोर में

गोदावरी नदी है  दूसरी गुफा में रास्ता लम्बा है और यहाँ पर गोदावरी नदी हमेशा बहती रहती है । कहा जाता की दुसरे गुफा में श्री राम और लखन  एक साथ बैठकर यहाँ दरवार किया करते थे । 

प्रथम गुफा से बहार आने पर दर्शनार्थी दूसरी गुफा में प्रवेश करते है पथरीली चट्टानों की सकरी गुफा में घुटनो तक के पानी में आगे चलते हुए भक्त ईश्वरी आस्था के साथ-

और प्राकृतिक नैसर्गिकका आनद लेते हुए भगवान्  का ज्ञाप करते  हुए आगे बढ़ते है । गुफा से बहती हुयी साफ स्वच्छ पानी की धरा आपको त्रेता युग के समय के घटना क्रमो का प्रत्येक साक्षी बना देती है  ।

3. सीता रसोई –

चित्रकूट की पहाड़ी पर बानी यह रसोई बहुत ही प्राचीन और पवित्र है मन जाता है है की माता सीता जी यही पर खाना बनाया करती थी ।

इस रसोई में उस समय के पठारों से बने हुए चूल्हे , बेलन , चौकी मौजूद है जिसे देखने और दर्शन करने के लिए भरी संख्या में टूरिस्ट चित्रकूट की यात्रा पर जाते है ।

4- जानकी कुंड –

गुप्त गोदावरी गुफा के अंदर ही जानकी कुंड है कहते  है की इस कुंड में माता सीता स्नान किया करती थी कुंड से आगे आने पर धनुष के आकर की एक प्राकृतिक कुंड है। जहा से गोदावरी नदी गुप्त रूप से प्रकट होती है ।

चित्रकूट में दर्शनार्थी यहाँ की  प्राकृतिक कुंड देखने के बाद गुफा में ही और आगे  बढ़ते है। जहा इन्हे मिलता है खटखटा चोर ।

5- खटखटा चोर –

 खटखटा चोर के बारे में ऐसी मान्यता है की एक बार जब  माता सीता स्नान कर रही थी तभी मतंग राक्षस ने उनके बस्त्रो को चुराकर भाग गया था ।

तब लक्ष्मण ने आक्रोश में आकर  उस राक्षस को यहाँ मार डाला था और  फिर इसी जगह पर माता सीता के एक बाल से उसे बाँध कर लटका दिए थे । 

जिसके लटकने के कारण  खट- खट  की आवाज आती थी तभी से इस जगह का नाम खटखटा चोर पड़ा ।

6- सती अनुसुइया- अत्रि आश्रम

पौराणिक इतिहास के अनुसार  ब्रह्मा , वृषनु , और महेश , का जन्म  भी चित्रकूट  नगरी में ही हुआ था कहा जाता है की माता अनुशिया के तपोवल से भगवान्  प्रसन्न होकर उन्ही के घर में जन्म लेने का निर्णय लिया।

चित्रकूट में घूमने की लायक जगहों में सती अनुसुइया काफी प्रसिद्द दार्शनिक स्थल है क्योंकि यहाँ आपको जीवंत सी लगने बलि रामायण काल की मूर्तिया बानी हुयी है जो त्रेता युग की यादे  तरोताजा करा देती है ।

ये जगह ठीक उसी तरह है जिस तरीके से वृन्दावन में जीवंत लगने बलि मुर्तिया बनी हुयी है

7- मन्दाकिनी नदी Mandakini river

जो सभी देवताओं के स्नान करने के स्थान है वो सब इस मन्दाकिनी नदी की प्रसंसा करते है ।

सब सर सिंधु नदी  नद नाना । मन्दाकिन कर करहि बखाना ।। उदय अस्त गिरी अरु कैलाषु मंदर मेरु सकल सुरबासू ।।

सारे तालाब समुद्र और नदिया और अनेको नद सभी मन्दाकिनी नदी की प्रसंशा करते है उदयान्चल अस्तांचल कैलाशा मंदरांचल और सुमेद आदि-

कहा जाता है की मन्दाकिनी नदी गंगा नदी का एक अंस  है और यह अनुसुइया जी के तपोबल से चित्रकूट के पवन नगरी में मन्दाकिनी नदी उत्पन्न हुयी थी ।

जब आप चित्रकूट धाम के लिए जाये तो यहाँ की मन्दाकिनी नदी में नाव की सवारी जरूर करे ।

राम घाट से आगे  2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जानकी कुंड है आप चाहे तो राम घाट से नाव में बैठकर जानकी कुंड तक पहुंच सकते है या फिर रोड के द्वारा भी जा सकते है ।

8- हनुमान धारा  –

चित्रकूट धाम में दर्शनार्थियों को जगह जगह पर दार्शनिक स्थान देखने को मिल जायेंगे उन्ही में से एक हनुमान धरा ।

ये वही जगह है जब भगवान हनुमान लंका दहन कर के वापस  लौटे थे तब अपने शरीर को आग से ठंडा पाने के लिए माता सीता का ध्यान किया था तब माता सीता ने अपने आशीर्वाद से एक शीतलता भरी जलधारा को उनके ऊपर प्रकट किया था तब से ये जलधारा आज तक उसी तरह बाह रही है जिसके नीचे भगवान हनुमान की पंचमुखी मूर्ती स्थापित की गयी है ।

9- सीता चरण मुद्रित सिला –Sphatik Shila

सारे संसार का ऐश्वर्य को धारण करने बाली जगत जननी देवी सीता के चरणों के निशान चित्रकूट धाम में आज भी मौजूद है ।

उनके चरणों की धुल को स्पर्श करने के लिए साल भर यात्रियों का आना जाना लगा रहता है इस शिला के बारे में रामायण में वर्णन मिलता है की एक बार देवी सीता यहाँ पर खड़े  होकर चिटकूट  की सुंदरता को देख रही थी

तभी जयंत ने काक रूप धारण कर के उनके पैरो  में चोंच मार दिया  था फिर भगवान्  राम ने काक के ऊपर तीर चलायी जिसके बाद जयंत तीनो लोको में भागा – भागा फिरा ।

लेकिन उसकी मदत किसी भगवान्  ने नहीं की फिर वापस आकर भगवान् राम के चरणों में आ गिरा तब से राम जी ने उसे सराफ दे दिया इसीलिए कौए एक आँख से अंधे होते है ।

जिस स्थान पैट देवी सीता खड़ी थी उसी स्थान पर उनके कोमल चरणों की निशान बन गयी जो आज तक अमर है ।

10- कामदगिरि पर्वत –

चित्रकूट के इस पवित्र पर्वत का उल्लेख हिन्दू पुराणों में मिलते है कहा जाता है की 14 बर्षो के बनबास के बाद जब श्री राम वापस अयोध्या लौटने लगे तो

पर्वत ने भगवान् से वापस न जाने के लिए कहा और साथ में उसने कहा की आपके जाने के बाद इस पर्वत में कोई मनुष्य दुबारा नहीं आएगा

तब भगवान् राम ने उसे आशीर्वाद दिया की जब तक मानव इस पर्वत के चक्कर नहीं लगाएंगे तब तक उनकी चार धाम यात्रा पूर्ण नहीं होगी इसीलिए चित्रकूट आने पर ही चारधाम पूर्ण हो पाती है । 

कामदगिरि पर्वत से लक्ष्मण चित्रकूट के जंगलो के चारो तरफ निगरानी करते  वही पर अब यहाँ एक लक्षमण टेम्पल बना हुआ है ।

दर्शनार्थी इस पर्वत के चारो तरफ 5 किलोमीटर का चक्कर लगाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते है ।

11- राम – भरत मिलाप मंदिर –

अयोध्या के राजा दशरथ के देहांत के बाद भरत ने राजगद्दी अस्वीकार करते हुए अपने बड़े भाई श्री राम को ढूढ़ने निकल पड़े थे  और चित्रकूट में इसी जगह पर उनका राम जी से मिलान हुआ था ।

चित्रकूट के पावन धाम में राम भरत मिलाप बाले स्थान में बहुत ही सुन्दर मंदिर बना हुआ है जहाँ जिसकी एक झलक पाने के लिए भरी संख्या में श्रद्धालु आते रहते है ।

12- भरतकूप –

रामायण के अनुसार दशरथ के द्वारा दिए गए बचन को माता कैकेयी ने श्री राम को 14  बर्षो का बनबास मांगा।

तथा राम बनबास के बाद पिता दशरथ अपने पुत्र के बिछड़ने के बियोग में अपने प्राण त्याग दिए । माता कैकेयी  के द्वारा किये गए

ऐसे व्यबहार से भरत  बहुत दुखी हुए और वो अयोध्या बसियो को लेकर राम से मिलने चित्रकूट पहुंचते है और भरत चाहते थे की

चित्रकूट धाम में ही अपने बड़े भैया श्री राम का राज्याभिषेक कर देंगे इसीसलिए दुनिया भर की पवित्र नदियों का जल एकत्रित कर के चित्रकूट लेकर आये थे ।

और जल को रखने के लिए एक कूप (कुंआ )बनाया था जिसे भरत कूप के नाम से जाना जाता है  

लेकिन भगवान् राम अपने पिता के द्वारा दिए गए बचन से दृढ़ प्रतिज्ञा थे और 14 बर्षो का बनबास काटने के बाद ही आयोध्या आने का निर्णय  लिया ।

तब भरत को दुखी  होकर श्री राम का खड़ाऊँ ( चप्पल ) अपने सर पर रखकर  वापस अपने नगर अयोध्या लौटना पड़ा ।

लौटने के बाद उन्होंने भी 14 बर्ष राजमहल का सुख से बंचित रहने की दृढ़ प्रतिघ्या ली और सरयू नदी  के किनारे एक कुटी में रहने का प्राण लिया ।

चिटकूट कब जाना चाहिए ?

दोस्तों चित्रकूट एक धार्मिक और दार्शनिक स्थल है इसीलिए यहाँ सभी मौसम में यात्रियों का आना जाना लगा रहता है लेकिन फेस्टिवल के समय खास तौर पर दीपावली के अवसर पर चित्रकूट दर्शन का सबसे बेस्ट समय होता है ।

इस मौसम में चित्रकूट चारोतरफ दीप से जगमगा उठता है ।

चित्रकूट में कहाँ रुके ?

तीर्थ यात्रियों को चित्रकूट में रुकने के लिए जगह जगह पर धर्मशाहालये बानी हुयी है यदि आप धर्मशाला में रुकना चाहे तो बिलकुल फ्री है । और इसके अलाबा चित्रकूट में काफी सस्ते होटल रुकने के लिए उपलब्ध है जिनका चार्ज 500 रूपए से 5000 तक होता है ।

चित्रकूट कैसे पहुंचे ?

दोस्तों चित्रकूट यात्रा के लिए रेल , हवाई जहाज और बया रोड के माध्यम से बड़े आसानी से पंहुचा जा सकता है

बया रेलमार्ग

अगर आप चित्रकूट रेलगाड़ी से पहुंचना छह रहे है तो इसका खुद का रेलवे स्टेशन ही लेकिन वह ज्यादातर गाड़िया नहीं रूकती इसीलिए आप सतना रेलवे स्टेशन तक पहुंचकर चित्रकूट के लिए प्रस्थान कर सकते है ।

बया हवाई जहाज

चित्रकूट हवाई यात्रा के माध्यम से पहुंचने बाले यात्रियों के लिए इसका नजदीकी एयरपोर्ट प्रगरान है जहाँ भारत के बिभिन्न बड़े शहरो से रोजाना उड़ने होती है । प्रयागराज से चित्रकूट की दूरी महज 119 किलोमीटर है जो की बस टैक्सी या फि ट्रैन से की जा सकती है ।

सड़क मार्ग

चित्रकूट भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग 7 पर स्थित है जो हर राज्य से अच्छी तरह से कनेक्ट है इसीलिए चित्रकूट सड़क मार्ग से पहुंचना बहुत ही शानदार है ।

दोस्तों इस लेख में आपने जाना चित्रकूट की यात्रा कैसे करनी चाहिए और यात्रा के दौरान चित्रकूट में कहाँ रुके , और चित्रकूट कब जाना चाहिए , उम्मीद करता हु आपके चित्रकूट धाम की यात्रा में घूमने की सम्पूर्ण जानकारी आपको मिल गयी होगी ।

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Faq related Chitrakoot- चित्रकूट के बारे में पूछे जाने बाले सवाल

चित्रकूट में किसका आश्रम था ?

चित्रकूट धाम में ऋषि अत्रि और माता अनुशिया निवास करते थे पौराणिक इतिहास के अनुसार  ब्रह्मा , वृषनु , और महेश , का जन्म  भी चित्रकूट  नगरी में ही हुआ था। कहा जाता है की माता अनुशिया के तपोवल से भगवान्  प्रसन्न होकर उन्ही के घर में जनम लेने का निर्णय लिया

चित्रकूट में घूमने के लिए क्या है?

1.सीता रसोई
2.राम घाट
3.गुप्त गोदावरी
4.जानकी कुंड
5.भरतकूप
6.राम – भरत मिलाप मंदिर
7.हनुमान धारा
8.सीता चरण मुद्रित सिला
चित्रकूट में इनके अलाबा भी बहुत जगह घूमने के लिए । जब यहाँ आप यहाँ घूमने आये  तो समय निकल कर आये क्योकि यहाँ आने बाद वापस लौटने का मन नहीं करता।

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