भीम बेटका की पूरी जानकारी । Complete information about bheem betka

विश्व प्रसिद्द स्मारक भीम बेटका  – भीम बेटका आदिमानव का रिहायती स्थान हुआ करता था और कहा जाता है की यहाँ पर वो तब से रह रहे थे जब उन्होंने पत्थरो के हथियारों का इस्तेमाल करना शुरू भी नहीं किया था ।

ये मानव जीवन के लाखो बर्षो के विकास और आज के आधुनिक समय और उस समय के बीच का अन्तर को दिखता है ।

भीम बेटका की ये प्राचीन बस्ती मध्यप्रदेश के रायसेन जिला में  रातापानी वाइल्ड में स्थित है तथा भोपाल से यह 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जहा पाषाण युग में आदिमानव की बस्ती हुआ करती थी ये करीब 10 किलोमीटर में फैली हुयी थी।

भीम बेटका का इतिहास । History of bheem betka in hindi

इस  क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण बिभाग ने साल 1990 में भारत की राष्रीय धरोहर का प्रमुख स्थान घोषित किया तथा यूनेस्को ने जुलाई 2003 को भीम बेटका को विश्व धरोहर में शामिल किया गया ।

भीम बेटका क्षेत्र की खोज भातीय पुरातत्व वैज्ञानिक वृष्णु श्री धार वाकडकर ने साल 1957 से 1958 के बीच किये थे  ।

यहाँ पर प्राचीन काल के मुख्य रूप से कई ऐसे अवशेष मिले जिनमे से –

  • प्राचीन किले की दीवार
  • पाषाण निर्मित भवन
  • शंख गुप्त कालीन अभिलेख
  • परमार कालीन मंदिर , जो यहाँ के सबूतों को आईना दिखाते है की भीम बेटका कभी आदिमानवों के रिहायशी जगह हुआ करती थी ।

भीम बेटका में प्रवेश करते हुए कई ऐसे पाषाण युग के अवशेषों जो गुफा की दीवारों पर लिख कई जानकारी के द्वारा मिलती है ।

यहाँ पर शैलचित्रो में बड़े ही खूबसूरती के साथ उस समय के सामाजिक वातावरण को चित्रित  किया गया है जिनमे से मुख्यतः –

  • सामूहिक नृत्य
  • शिकार
  • पशु पक्षियों से प्रेम
  • प्राचीन काल के युद्ध
  • आखेट
  • प्राचीन मानव जीवन के रहन सहन
  • हाथी ,घोड़े की सवारी
  • जंगली सूअर
  • बाघ, शेर
  • कुत्ते घड़ियाल
  • प्राचीन आभूषण
  • शहद जमा करने के स्थान

इन चित्रों को लाल , गेरुआ , सफ़ेद , पीला और हरे रंग से चित्रित  किया गया है । शैलाश्रय के आंतरिक भाग में लगभग 1 लाख बर्ष पुराने प्यालेनुमा निशान उत्क्रीड है ।

भीम बेटका की गुफाओं की दीवारे प्राचीन सभ्यता के धार्मिक संकेत देती है जो उस समय कलाकारों के बीच लोक प्रिय हुआ करता था ।

भीम बेटका गुफा के रोचक तथ्य । Fact of bheem betka

इक्कीशवी शदी में भीम बेटका में पाषाण शैलचित्र शायद हमें ये आइना दिखाते  है की हम मानवो ने विकास  के इस दौर में क्या – क्या खो दिया है ।

जैसे :-

  • आपसी मेल जोल
  • प्रकृति से रिश्ता ,
  • कला संगीत से सम्बन्ध ,
  • और सबसे ज्यादा अपनी मनुष्यता जो आज हम मानव जाति को सोचने की जरूरत है ।

यहाँ मौजूद 600 से भी ज्यादा  गुफाये जो प्राचीन भारतीयों का घर हुआ करती थी। 

ऐसा माना जाता है की महाभारत के समय पांडवो के भाई भीम यहाँ पर रुके हुए थे इसी कारण इस जगह को भीम बेटका के नाम से जाना जाता है ।

भारतीय वैज्ञानिक श्री विष्णु धार  ने इस जगह की खोज 1952 किया था और इस खेत्र में 600 से ज्यादा शैलाश्रय  की खोज की थी जिनमे से 257 शैलआश्रय चित्रों के द्वारा सजाये गए थे ।

ऐसा मन जाता है की पूर्व पाषाण काल से मध्य पाषाण काल तक यह जगह आदिमानव की गतिविधि का केंद्र रही होगी।

शैलाश्रय क्या है । shailasray kya hai 

पाषाण युग में आदिमानव जानवरो से बचने के लिए प्राकृतिक गुफाओं में रहते थे और उन्ही के रहने के स्थान को या को घरो तथा गुफाओं को शैलाश्रय कहा जाता है । जो  इसके नाम से ही पता चलता है शैल+आश्रय  मतलब

पत्थरो तथा चट्टानों का घर जहा आदिकाल में हमरे पूर्वज जानवरो के शिकार से बचने के लिए रहा करते थे उसे शैलाश्रय के नाम से जानते है

आदिमानवों के द्वारा उन्ही गुफाओं में बनाये गए चित्र को आज के आधुनिक युग में हम उसे शैल चित्र के नाम से जाना जाता है ।

भीम बेटका की गुफाये कितने साल पुरानी  है

अब से लगभग 30 हजार बर्ष पहले आदिमानव  शैलचित्र भी बनाने लगे थे खनिज तत्वों से भरे रंगीन पत्थरो को पीसकर जानवरो की चर्वी और खून मिलकर वो रंग बनाते  थे ।

आदिमानव की सभ्यता की दिखाते  हुए ये चित्र हमें हजारो साल पीछे ले जाते है गुफा की दीवारों पर गेरुए ,लाल और सफ़ेद रंगो के इस्तेमाल से बनी हुयी ये पाषाण शैलचित्र हमें मंत्र मुग्ध कर देती है ।

गुफा की दीवारों पर आदिमानवों ने बड़े ही सहजता से पाषाण युग की सभ्यता को खूबसूरत ढंग से चित्रित किया है , सोचिये भला आज से हजारो साल पहले ये शैलचित्र किसी आदिमानव ने बनाया होगा ।

और आप उन्हें बड़े  सहजता से  भीम बेटका की इन  गुफाओं में देख पा रहे होंगे ये दृश्य आपको मनमोहित कर देगा ।

भीम बेटका गुफा कहा स्थित है । where is bheem betka in hindi

मध्यप्रदेश के रायसेन जिला में राता पानी वाइल्ड लाइन में तथा विंध्य पर्वत के दक्षिणी भाग में आदिमानव द्वारा निर्मित पुरा पाषाण कलाएँ आवासीय स्थल है ।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित भीम बाटिका पाषाण कालीन युग में  हमारे पूर्वजो के द्वारा बनायीं गयी उस समय के शैलचित्र

हमरे लाखो बर्षो के विकास  की यात्रा को दिखता है की हमारे पूर्वजो के द्वारा बनाये गए ये कलात्मक दृश्य हमें आज भी उस समय के बारे में

सीधे -सीधे सन्देश देते है । जो हम और आप इसे देख पा रहे है ये चित्र उस आदिमानव और हमारे बीच के उस कॉमन कड़ी का प्रतीक है ।

भीम बेटका किसके लिए प्रसिद्द है

आज के आधुनिक युग में कलाकारों के कला को मॉडर्न ज़माने का माना जाता है लेकिन  क्या आपने कभी सोचा है की ये कला मनुष्यो के अंदर कब से है ।

भीम बेटका लाखो बर्षो की सभ्यता और मानव जाति के विकास और लगातार बदलती परम्पराओं के लिए प्रसिद्द है जो हमें आज के आधुनिक समय में ये आइना दिखाता है की इस विकास के दौर में हम लोगो ने  क्या- क्या पीछे छोड़ दिया ।

भोपाल में घूमने की प्रसिद्द जगह भीम बेटका में  पर्यटक  प्राचीन सभ्यता को यहाँ के शैल चित्रों के माध्यम से देख सकते है ।

भीम बेटका कैसे पहुंचे 

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रातापानी वाइल्ड लाइन में स्थित लाखो बर्ष पुराने गुफा भीम बेटका पहुंचने के लिए पहले भोपाल शहर में पहुंचना होगा फिर

यहाँ से टैक्सी या प्राइवेट वाहन  लेकर 45 किलीमीटर की दूरी तय कर के पहुंच पाएंगे आदिमानवी बस्ती देखने भीम बेटका ।

अगर आप कभी भोपाल के आस पास से गुजरे तो समय निकल कर आदिमानवों के रहने के स्थान तथा उनके द्वारा बनाये गए शैलचित्रो को देखने जरूर आईयेगा।

रायसेन में स्थित भीम बेटका को मानव जीवन का के विकास का प्रारभिक हिस्सा माना जाता है ।

भीम बेटका के नजदीकी पुरातात्विक स्थल 

भीम बेटका के जैसे और भी कई जगह पाषाणकाल के सबूत मिल चुके है जिनमे से सबसे पहले भीम बेटका , भोपाल रायसेन रोड पर चिड़िया टोला में सबूत उस समय की गवाही प्रकट करते है।

इनके अलाबा रायसेन जिला में गांव पाटनी में मृगेंद्र नाथ नामक गुफा  में शैलचित्रो का वर्णन किया गया है तथा होशंगाबाद जिला के बुधनी नामक स्थान पर खदान की खुदाई के दौरान पाषाण काल के कुछ शैलचित्र अवशेष प्राप्त किये गए।

जो भीम बेटका से 5 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है । इन सभी शैलचित्रो की प्राचीनता अधिकतम 35 हजार साल पुरानी आंकी गयी है ।

यदि आप कभी भोपाल या पंचमढ़ी के आस पास से निकले तो एक बार भीम बेटका की प्राचीन गुफाओं को देखने अवश्य जाये ।

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मै वादा करता हु की आप इन हजारो साल पुराने शैलचित्रो को संजीदगी से देखेंगे तो पाएंगे एक जीवन भर का एक्सपीरियंस । और यहाँ आकर आपको एक अलग ही अनुभव का अहसास देगा ।

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