अयोध्या में घूमने की जगह । अयोध्या के प्रसिद्ध मंदिर

अयोध्या वो जगह है जहा से भारत देश ने दुनिया को धर्म और कर्त्तव्य का पालन करने का सन्देश दिया अयोध्या में घूमने की जगह यहाँ के प्रसिद्ध मंदिर जो रामायण काल से ही भारत देश की संस्कृति का अहम् हिस्सा बन चुकी है जहा प्रभु राम का जन्म हुआ।

भगवान् राम की जन्म स्थालीऔर सरयू नदी के किनारे स्थित अयोध्या देश के सबसे प्राचीन और हिन्दू धर्म के सात पवित्र स्थानों में से एक है उन्ही में से एक है अयोध्या नगरी  जिसे सतपुरिया के नाम से भी जाना जाता है ।

पवित्र नगरी अयोध्या धाम का नाम सुनते ही हर मानव के मन में एक सवाल जरूर आता है काश त्रेता युग में हमारा भी भगवान् राम के सैनिक के रूप में जन्म हुआ होता तो प्रभु के चरणों की धुल मिल जाती ।

अयोध्या में घूमने की जगह। ayodhya me ghumne ki jagah

अयोध्या घाटों और गलियों का एक मशहूर शहर है साथ ही धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी जो ढेरो मंदिरो और पर्यटन स्थलों को समेटे हुए है ।जहा जाकर आप भारत की संस्कृति को न केबल करीब से देख सकते बल्कि खुद के हिन्दू होने पर भी गर्वित महसूस करेंगे।

तो चलिए अब हम जानते है की अयोध्या के प्रसिद्द मंदिर रावं अयोध्या में घूमने की जगह कौन – कौन सी है

राम जन्म भूमि

यह स्थान अयोध्या में रामकोट नमक पहाड़ी पर स्थित है जो अयोध्या रेलवे स्टेशन से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है ये पवित्र स्थान अयोध्या में घूमने की जगह में सबसे प्रमुख है क्योकि इसी स्थान पर भगवान् राम का जन्म हुआ था ।

इसी स्थान पर दशरथ पुत्र श्री राम को माता कौशिल्या ने जन्म दिया था तब से पृथ्वी की ये जगह तीर्थ स्थान बन चुकी है तभी तो यहाँ हर मौसम में भारी तादात में श्रद्धालुअपनी मनोकामना लेकर अयोध्या तीर्थ स्थल की इस पावन भूमि में पहुंचते है ।

अयोध्या धाम में अब भारतीय सरकार द्वारा यहाँ श्री राम और माता सीता का भव्य मंदिर का निर्माण करवाया जा रहा है।

राम की पैड़ी

सरयू घाट के किनारे स्थित राम की पैड़ी पौरादिक कथाओं के अनुसार एक बार लक्षमण जी ने भारत बर्ष में सभी तीर्थ स्थानों को घूमने के लिए जाना कहते थे तभी श्री राम ने सरयू नदी के किनारे इस पैड़ी की स्थापना की थी ।

पौराणिक कथाओ के अनुरूप उन्होंने ये कहा था की  शंध्या के समय सभी तीर्थ स्वयं इसी स्थान पर स्नान करने के लिए प्रकट होंगे तभी से ऐसी  मान्यता है की शंध्या आरती बंदन के समय यहाँ पर जो भी दर्शनार्थी इस घाट में स्नान करेंगे उन्हें सभी तीर्थो के पुण्य एक साथ यही मिल जायेंगे 

किन्तु श्री राम जी की जल समाधी लेने के बाद यह स्थान कई बर्षो तक सूखा रहा बाद में इसका निर्माण मानवीय दृश्टिकोण से करवाया गया और अभी इसका जल सरयू नदी से मोटर द्वारा भरा जाता है ।

हनुमान गढ़ी

जहा प्रभु राम होंगे वहा कण – कण में भगवान् हनुमान होंगे यह मंदिर अयोध्या का सबसे ज्यादा प्रसिद्द मंदिरो में से एक है ऐसी मान्यता है की प्रभु श्री राम ने आयोध्या की रक्षा के लिए भगवान् हनुमान को यहाँ बिराजमान रहने के लिए आज्ञा दी थी ।

भगवान् राम के राज्य में हनुमान अपने शीशम (अदृश्य) रूप में वास कर रहे है और जहा ये वास करते है उसी स्थान को हनुमान गढ़ी कहा जाता है ।

यह मंदिर एक पहाड़ की छोटी पर स्थित है इसीलिए यहाँ से अयोध्या का एक शानदार दृश्य दिखाई पड़ता है ।

ऐसा कहा जाता की जो भक्त अयोध्या दर्शन के लिए आते है तो सबसे पहले हनुमान जी से अनुमंती लेनी होती है मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियों को लाँघ कर भक्त दर्शन के लिए पहुंचते है ।

कनक भवन

यह ऐतिहासिक धरोहर हनुमान गढ़ी के निकट ही स्थित है जहा पर अयोध्या में घूमने की जगह देखने आने बाले पर्यटक माता सीता और प्रभु राम की प्रतिमाओं में सोने की मुकुट बाली प्रतिमाओं को देखने आते है

यहाँ राम और सीता माता की प्रतिमा भारत के सबसे सौंदर्य प्रतिमा में बिराजमान है ।

कनक भवन अयोध्या धाम की सबसे सुन्दर वास्तुकला में से एक है जो आने बाले भक्तो को अपनी तरफ आकर्षित करती है ।

पौराणिक कथाओ के अनुसार इस स्थल को भगवन राम की सौतेली माँ कैकेयी ने सीता के मुँह दिखाई में दिया था लेकिन समय की मार के बजह से ये मंदिर खँडहर होता गया बाद में राजा विक्रमादित्य ने और फिर टीकमगढ़ की महारानी ने  1851 में फिर से नव निर्मित किया था।

नागेश्वर नाथ मंदिर

राम पैड़ी के किनारे स्थित यह मंदिर का निर्माण प्रभु राम के पुत्र कुश ने करवाय था कथा कहती है की एक बार कुश सरयू नदी में स्नान कर रहे थे तभी अचानक उनका बाजूबंद कही खो गया था

और ये बाजु बंद एक नाग कन्या के हाथ लगा और फिर उसी से कुश को प्रेम हो गया था नागकन्या को शिव में अथाह भक्ति थी फिर कुश ने उसी कन्या के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया था ।

इतिहास के अनुसार विक्रमादित्य के शाशन में यही एक मंदिर सुरक्षित बचा था बाकि सारा कुछ खँडहर में बदल गया था क्यूंकि यहाँ पर स्थित शिवलिंग को 12 ज्योतिर्लंगो में एक मन जाता है ।

दशरथ महल

हनुमान गढ़ी से लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित है राजा दशरथ का महल अयोध्या सिटी  के बीच बीच स्थित है जिसके गर्वगृह में प्रभु राम और सीता की सुन्दर मूर्तिया स्थापित की गयी है ।

मंदिर प्रांगड़ में हमेशा बाध्य गीत होती रहती जो अयोध्या में घूमने की जगह में पर्यटकों को राम लीला पूरी तरह से मन्त्र मुग्ध कर देती है ।

त्रेता के ठाकुर

अयोध्या धाम में सरयू नदी के नया घाट में स्थित एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान् राम सीता को सर्पित है । ये वही जगह है जहा पर रामायण काल में अश्व मेध यज्ञ करवाया गया था ।

और साथ में मंदिर में बिराजमान मूर्ति प्राचीन मूर्ति मानी  जाती है जो काला रेत से बनायीं गयी  थी ।

गुप्तार घाट

अयोध्या में सरयू तट के किनारे स्थित यह एक पवित्र और पूजय्नीय स्थान है ऐसा मान्यता है की राम जी ने अपना राजपाठ अपने पुत्र लव -कुश को सौपने के बाद इसी घाट में अयोध्या बासियो संघ यही पर जल समाधि ली थी।

तभी से अयोद्या का यह घाट हिन्दुओं का प्रसिद्द तीर्थ स्थल माना जाने लगा है । इस घाट में कई आकर्षक मन्दिर बने हुए है जिनमे से –

  • राम मंदिर
  • चक्र हरी मंदिर
  • नॅशिंघ मंदिर

यह घाट हमेशा श्रध्हलुओ से भरा हुआ रहता है इसकी दूरी रेलवे स्टेशन से मात्रा 3 किलोमीटर है ।

सीता की रसोई

यह राम जन्म भूमि से उत्तर पशिचम में स्थित है इस मंदिर में राम -सीता के साथ- साथ उनके भाई  लक्षमण, भरत और शत्रुध्न और उनकी पत्निया उर्मिला , मांडवी और शुक्रिति की प्रतिमाये है ।

वैसे तो माता सीता ने कभी अयोध्या में भोजन नहीं पकाई थी लेकिन रीति रिवाजो के हिसाब से विवाह के बाद ससुराल का पहला दिन नयी बहु को खाना पकाना होता है।

इसी बजह से जब देवी सीता आयोध्या आयी थी तो पहले दिन इसी रसोई में भोजन पका कर घर के सभी सदस्यों को खाना परोसी थी ।

इसी लिए यह स्थल समस्त मानव जीवन के लिए अन्नपूर्णा के तरह है ।

तुलसी स्मारक भवन

इसका निर्माण 16 वी शताब्दी के संत कबि तुलसी दास जी के स्मृति में इसका निर्माण करवाया गया 1969 में निर्मित यह भवन में  ऐतिहासिक पुस्तकालय भी है जो समृद्धि और साहित्य का भंडार है ।

स्मारक परिसर के अंदर  हर दिन शाम रामायण लीला का आयोजन किया जात है अयोध्या घूमने आये हुए पर्यटक  शाम होते ही यहाँ टोली उमड़ पड़ती है ।

मणि पर्वत

यह एक छोटी पहाड़ी नुमा जगह है जिसके बारे में कहा जाता है की युद्ध में मेधनाथ शक्ति लगने के बाद लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे और उनके उपचार के लिए संजीवनी बूटी की जरुरत थी और उसी के तलाश में हनुमान में पूरे पाहड को उठा लिया था ।

माना  जाता है उस बिशाल पर्वत का एक भाग इसी अयोध्या में इस जगह में गिर गया जिसे मणि पर्वत के नाम से जाना जाता है इसकी कुल ऊंचाई 65 फिट है

जहा खड़े हो कर शहर के सुन्दर दृश्य के अलाबा अशोक सम्राट द्वार निर्मित सपूत एवं बौद्ध मैथ को बखूबी देख सकते है ।

गुलाब बाड़ी

अवध  के नबाब सुजा उद्दौला एवं उनके परिवार के मकवरे के रूप में इसे साल 1775 में स्थापित किया गया यह स्थान चारो तरफ से गुलाब के फूलो से घिरा हुआ है जिसके बजह से इसका नाम गुलाब बाड़ी पड़ा ।

पुराने जमाने मे गुलाब बाड़ी में  गुलाब के फूलो की बिभिन्न प्रजातियां उगाई जाती थी लेकिन अब कुछ ही जातीय बची हुयी है ।

अयोध्या का इतिहास 

उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित अयोध्या का इतिहास लगभग 9000 बर्ष पुराना है कहा जाता है की राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या में  श्री राम का भव्य मंदिर बनबाया था लेकिन 1528 में मुग़ल  शाशक के आदेशों में मंदिर को पूरी तरह स नष्ट कर दिया गया था।

बाद में इसी स्थान पर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। जिसे  1992 में करश्री के द्वारा ध्वश्त कर दिया गया इसी के बजह से ये बिषय दो धर्मो के बीच  बिबाद का है ।

और इसका फैसल सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं के पक्ष में दिया और 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन से भगवान् श्री राम का एक भव्य मंदिर का निर्माण प्रारम्भ किया गया ।

पौराणिक कथाओ के अनुसार अयोध्या धाम हिन्दू धार्मिक से जुड़ा हुआ है कहते है त्रेता युग में भगवान् वृष्णु ने धरती पर पापियों को ख़त्म करने के लिए स्वयं इंसानी रूप में राजा अयोध्या नरेश दशरथ के घर राम के रूप में जन्म लिया था ।

तब से यह पावन पवित्र स्थान हिन्दुओं का तीर्थ स्थल बन गया

यहाँ पर कई ऐसे अवशेष मिल चुके है जो सच में यह साबित करते हैकी अयोध्या नगरी का स्रोत किसी दैविक शक्तियों से जुड़ा हुआ था ।

श्री राम जी अपने 14 बर्षो के बनवास काल के दौरान अयोध्या से चलकर चित्रकूट के विंध्यांचल पर्वत की मालयो में 11 बर्षो का समय बिताया था । तभी तो सबूतों के तौर पर माता सीता के पैरो के निशान आज भी चित्रकूट में मौजूद है ।

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अयोध्या कैसे जाये

अयोध्या पहुंचने के लिए शहर के भीतर स्थित फैज़ाबाद रेलवे स्टेशन के नाम से अयोध्या का या स्टेशन है । जहा पहुंचकर आप अयोध्या के प्रसिद्द मंदिर को देख सकते है।

हवाई यात्रा कर अयोध्या पहुंचना चाहते  है तो यहाँ का निकटतम एयरपोर्ट लखनऊ है जहा से अयोध्या की दूरी 135 किलोमीटर है यहाँ से अयोध्या जाने के लिए आप बस या टैक्सी लेकर बड़े आसानी से पहुंच सकते है ।

अयोध्या कब जाये

वैसे तो अयोध्या में घूमने की जगह देखने के लिए किसी भी मौसम में पहुंच सकते है अयोध्या के प्रसिद्द मंदिर के दर्शन प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से  मार्च का होता है और इसी समय सबसे ज्यादा लोग अयोध्या पर्यटन स्थल पहुंचते है ।

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